मुंबई में आकर अगर सिर्फ मुंबई के कुछ जगहों को देख कर अपने शहर चले गए तो क्या खाक मुंबई आए! इसी बात को सही साबित करने के लिए मैंने ठाना था कि अगर मुंबई आ ही गया हूं तो इसके आसपास की कुछ जगहों को भी देख लेता हूं। इसी क्रम में मैं निकल गया लोनावाला। जो कि एक हिल स्टेशन है जहां छुट्टी के दिनों में मुंबई और आसपास के लोग यहां नेचर की गोद में अपने करीबीजन केसाथ अपना क्वालिटी टाइम बिताने आते हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं, मुंबई से लोनावला कैसे जाएं? लोनावला में घूमने की जगहें कौन सी हैं? वहां क्या खाएं? और यह किस चीज के लिए मशहूर है? तो यह पूरा ब्लॉग आपके लिए है।
इस एक दिन के ट्रिप के लिए मैंने शेयरिंग में टैक्सी की थी। जो मुंबई के किसी तय जगह से पिकअप करके वापिस मुंबई में ही ड्रॉप करते हैं। सुबह के 5.30 बजे मुंबई से कैब लेकर मैंने इस ट्रिप का बिस्मिल्लाह किया। साथ ही नगौरी चाय और बन मसका खाकर दिन की अच्छी शुरुआत कर ली थी।
करीबन डेढ़ घंटे की ड्राइव के बाद सबसे पहला पड़ाव खंडाला आया। ये वही खंडाला है जिसे बचपन में एक गाने मैंने बहुत सुना था “सुन, सुना आती क्या खंडाला? क्या करूं आके मैं खंडाला?” दरअसल में उस गाने में इसी खंडाला की बात की जा रही थी। कुछ टाइम यहां बिताने के बात हम आगे की ओर बढ़े।
मुंबई-पुणे हाइवे होकर जो रास्ते का नजारा दिख रहा था वो किसी सपना सच होने से कम नहीं था। हाईवे तो शानदार था ही इसके साथ ही हरियाली से भरे पहाड़ और रुक-रुक कर आने वाली ठंडी हवा के पीछे गाड़ी का एसी भी फेल था। इसी बीच जो दूसरा पडाव आया वो था कार्ला केव्स और उसी के बगल में माई एकवीरा का मंदिर। पार्किंग में गाड़ी लगाने के बाद यहां सड़क से चढ़ाई शुरु होती है। करीबन 150-200 सीढ़ियां से चलने में थोड़ी थकान होना तो लाजमी था। लेकिन ऊपर जो नज़ारा दिखता है वो सब थकान मिटा देता है। कार्ला केव्स लगभग 2000 साल पुरानी बौद्ध गुफाएं हैं जो चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं। ये गुफाएं भारत की सबसे सुंदर और प्राचीन रॉक-कट गुफाओं में से एक है। जिसके अंदर जाकर डिजाइन तो अपनी ओर आकर्षित करता ही है साथ ही वहां एक अगल ही शांति का एहसास होता है। गुफाओं ठीक बगल में है माई एकवीरा का मंदिर। जो की कोली समाज के लोगों की कुल देवी है। इस मंदिर की मान्यता का अंदाज़ा यहां आए हुए श्रद्धालुओं को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। साथ ही मंदिर में अगरबत्तियों, नारियल और फूलों की खुशबू से मन को एक सुकून मिलता है।
यहां से आगे चलने पर आता है मंकी प्वाइंट जहां मुझे तो बंदर नहीं मिले लेकिन ड्राइवर ने बताया यहां काई बंदर रहते हैं इसीलिए इसे मंकी प्वाइंट कहते हैं। इसके कुछ ही दूरी पर सेल्फी प्वाइंट है जहां से वादियों का जो नज़ारा दिखता वो काफी मनमोहक है। बस मन कर रहा था कि निहारता ही जाउं। यहां से और ऊपर जाने के बाद टाइगर और लॉइन प्वाइंट आया। लेकिन यहां तक जाने तक रास्ते में कई मोड़ आते है जो किसी फिल्मी सीन जैसे लगते हैं। एक तरह घाटी और दूसरी तरफ घने पेड़ और बीच से गुजरती पतली सी सड़क जो टाइगर प्वाइंट तक पहुंचाती है। टाइगर प्वाइंट पर खड़े होकर दूर-दूर तक फैली घाटी, ठंडा मौसम, और बादलों के बीच रहने का जो एहसास होता है वो कभी ना भूलने वाला एहसास होता है। यहां की हवा इतनी तेज थी कि मानो लग रहा था कि अभी उठा के फेंक देगी। लेकिन उस हवा में जो ताजगी थी उसका एहसास बहुत ही कम जगहों पर मैंने किया है।
यहां से आगे अब हम भुशी डैम गए, यहां जाकर लगा जैसे पूरा लोनावाला यहीं आ गया हो। बारिश के मौसम में ये जगह एकदम जिंदा हो जाती है। लोग डैम के बहते पानी में नहा रहे थे, सीढियों और पत्थरों पर बैठकर सेल्फी लेकर इस यादगार दिन कैमरे में कैद कर रहे थे। साथ ही गरमा गरम भुट्टे और मैगी का आनंद ले रहे थे। यहां आकर ऐसा लगा जैसे हर किसी के अंदर का बच्चा जिंदा हो गया हो, डैम के पानी में भीगना और दोस्तों के साथ मस्ती करते लोग इस वातावरण को खुशनुमा बना रहे थे। यहां एक तरह की आजादी का एहसास भी करा रहे थे जो शहर के भीड़ में खो जाती है।
इसके बाद लगभग 20 किलोमीटर की ड्राइव कर के हम पावना लेक पर गये जहां जाने का रास्ता कच्चा और कठिन जरूर था लेकिन वहां पहुंच कर लेक को देखना काफी सुखद था। ये झील इंसानों द्वारा बनाई गई है जो की पावना बांध के पानी से बनाया गया है। यहां काफी सारे कॉटेज और स्टे के ऑप्शन भी मौजूद है। यहां समय बिताना फुल पैसा वसूल है।
अब बात करें लोनावाला में खाने की तो यहां मैगी, मिसल पाव, साउथ इंडियन, नॉर्थ इंडियन सभी तरह के खाने के ऑप्शन मिल जाते हैं। लेकिन लोनावाला की चिक्की काफी मशहूर है। जिसे उत्तर भारत में हम गुड़ की पट्टी कहते है। इसके साथ ही फ़ज भी हर दूसरी दुकान पर खानें को मिल जाएगी। फज़ एक दूध या क्रिम से बनी मिठाई होती है जो कि अलग अलग फ्लेवर में बनाई जाती है। अब मेरे लिए तो ये चिक्की बहुत महंगी थी लेकिन याद के लिए कुछ खरीद ली और फ़ज लेकर मुंबई जाने के रवाना हुआ। रास्ते में डूबता सूरज देखकर मन में बस यही ख्याल आ रहा था कि एक दिन में कितना कुछ देख लिया। और चंद किलोमीटर की दूरी पर कुदरत कैसे अलग रंग दिखाता है।
अगर आप मुंबई में रहते हैं और एक दिन का मिनी वीकेंड ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो लोनावाला परफेक्ट ऑप्शन है। यहां इतिहास, प्रकृति, खाना और खुशनुमा माहौल का एक संगम दिखता है। आपको यह यात्रा अनुभव कैसा लगा ये आप कमेंट में लिखकर बता सकते हैं। इस तरह की और भी यात्रा अनुभव पढ़ने के लिए मन घुमक्कड़ के मेन पेज पर जा सकते हैं। साथ ही हमें इंस्टाग्राम, फेसबुक और युट्युब पर फोलो कर सकते हैं।

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