मायानगरी मुंबई (Mumbai) जो बाहरी लोगों के लिए सिर्फ बॉलीवुड स्टार और फिल्मी दुनिया के लिए जानी जाती है लेकिन यहां कई ऐसे प्राचीन और सुंदर मंदिर भी जो मुंबई की संस्कृति और आस्था में चार चांद लगाते हैं। चारों ओर समुद्र से घिरी मुंबई की सुंदरता यही है कि यहां बॉलिवुड की चमक-धमक से लेकर मन को शांति देने वाले कई मंदिरों की विभित्ता है। जहां आप आकर न केवल अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना कर सकते हैं। बल्कि अपने मन को शांत कर सकते हैं तो आइए जानते हैं मुंबई के इन खास मंदिरों के बारे में:
- महालक्ष्मी मंदिर (Mahalaxmi Temple Mumbai)
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर (Mahalaxmi Temple) शहर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 16वीं-17वीं शताब्दी के बीच हुआ था। आज के समय में यह मंदिर भूलाबाई देसाई रोड़ पर है। यह मंदिर महालक्ष्मी के नाम से प्रसिद्ध है लेकिन यहां देवी काली और सरस्वती की भी पूजा की जाती है। यहां के लोकल लोग इसे तीन देवियों वाला मंदिर भी कहते हैं। धनतेरस और दिवाली के शुभ अवसर पर यहां भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है। वहीं अन्य दिनों में भी यहां आने वाले लोगों की कतार में कोई कमी नहीं होती है। मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से दीवार पर सिक्के चिपकाकर जो भी मांगता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
महालक्ष्मी मंदिर कहां है?
लोकेशन- भूलाबाई देसाई रोड़, महालक्ष्मी, मुंबई
महालक्ष्मी मंदिर के सबसे पास कौन सा रेलवे स्टेशन है?
महालक्ष्मी मंदिर जाने के लिए सबसे नियरेस्ट रेलवे स्टेशन प्रभादेवी और महालक्ष्मी दोनों ही है। वहां से शेयरिंग कैब करके आसानी से मंदिर तक जा सकते हैं।
महालक्ष्मी मंदिर कब तक खुला रहता है?
महालक्ष्मी मंदिर रोजाना सुबह 6.30 से रात 10 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
2. सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple Mumbai)
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में क्या बॉलिवुड स्टार क्या आम इंसान, टाटा, अंबानी सभी इस मंदिर भगवान गणेश का आशिर्वाद लेने आते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता है। वैसे तो यहां सालभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है लेकिन गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां की रौनक अलग ही होती है। इस मंदिर का निर्माण साल 1801 मं लक्ष्मण विथु और देउबाई पटेल ने करवाया था। मंदिर प्रशासन की माने तो इस मंदिर में भगवान गणेश की मुर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। इस मंदिर में एक मान्यता और है कि जो श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने के बाद पास में बने मूषक के कान प्रार्थना करता है उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
सिद्धिविनायक मंदिर कहां है?
सिद्धिविनायक मंदिर एस के बोले मार्ग, प्रभादेवी, मुंबई में है।
सिद्धिविनायक मंदिर के पास कौन सा रेलवे स्टेशन है?
सिद्धिविनायक मंदिर के सबसे पास में प्रभादेवी और दादर दोनों ही रेलवे स्टेशन पास है।
सिद्धिविनायक मंदिर कब खुला रहता है?
सिद्धिविनायक मंदिर बुधवार से सोमवार सुबह 5.30 से रात 10 बजे तक और मंगलवार सुबह 3.15 से रात 10 तक खुला रहता है।
3. मुंबादेवी मंदिर (Mumba Devi Temple)
मुंबई की कुलदेवी मानी जाने वाली मुंबादेवी (Mumba Devi) का मंदिर मुंबई (Mumbai) के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। मुंबई में रहने वाले लोग मुंबा देवी को अपनी कुलदेवी मानते हैं। कहा जाता है कि मुंबा देवी का मूल मंदिर पहले बोरी बंदर में बनाया गया था जो छह सदी पुराना था लेकिन जब वह मंदिर नष्ट हो गया तो 18वीं शताब्दी में जावेरी बाजार में इसका फिर से निर्माण किया गया और आज भी यह मंदिर अपनी भव्यता और भक्तों की मनोकामना पूरी करने के लिए जाना जाता है। खासकर नवरात्रि के समय यहां भक्तों का मेला लगा रहता है। मान्यता है कि मुंबादेवी मुंबई के सात द्वीपों के मूल निवासियों, एग्री (जो नमक इकट्ठा करने का काम करते थे) और कोली (जो मछली पकड़ने का काम करते थे) की संरक्षक देवी थी। इस मंदिर की एक बात जो सबसे अनोखी है वो ये कि यहां हर दिन माता का वाहन बदलता है। जैसे सोमवार को नदी, मंगलवार को हाथी, बुधवार को मुर्गा, गुरुवार को गरुड़, शुक्रवार को हंस, शनिवार को हाथी और रविवार को सिंह आदि वाहनों पर देवी मुंबा विराजमान होती है और ये सभी वाहन चांदी के बने होते हैं।
मुंबादेवी मंदिर कहां है?
मुंबादेवी मार्ग, जावेरी बाजार, मुंबई में मुंबा देवी मंदिर है।
मुंबादेवी मंदिर जाने के लिए सबसे पास रेलवे स्टेशन कौन सा है?
मुंबादेवी मंदिर जाने के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल (CSMT) रेलवे स्टेशन है। वहां से बड़ी ही आसानी से शेयरिंग और प्राइवेट कैब से मुंबादेवी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
मुंबादेवी मंदिर खुलने का क्या समय है?
मुंबादेवी मंदिर मंगलवार से रविवार सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
4. इस्कॉन मंदिर (Iskcon Temple Mumbai)
इस्कॉन मंदिर यूं तो पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान के लिए जाना जाता है लेकिन जब बात हो मुंबई के इस्कॉन मंदिर की तो ये मंदिर अपनी आध्यात्मिकता और दिव्यता दर्शाता है। ये मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है जो कि संगमरमर और कांच का बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण 1978 में किया गया था। जहां हर दिन सुबह और शाम की आरती सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां एक बात जो अजब की दिखी वो ये कि भीड़भाड वाले मुंबई में इस मंदिर के आसपास का वातावरण काफी शांत रहता है।
इस्कॉन मंदिर कहां है?
इस्कॉन मंदिर हरे कृष्णा भूमि, जुहू, मुंबई में है।
इस्कॉन मंदिर कैसे जाएं?
जुहू बीच से कुछ दूरी पैदल चलकर भी आप इस्कॉन मंदिर जा सकते हैं।
इस्कॉन मंदिर के सबसे पास कौन सा रेलवे स्टेशन है?
इस्कॉन मंदिर के सबसे पास में अंधेरी और विले पार्ले रेलवे स्टेशन है जहां से ऑटो या कैब से बड़ी ही आसानी से इस्कॉन मंदिर जा सकते हैं।
इस्कॉन मंदिर किस समय खुला रहता है?
इस्कॉन मंदिर हर रोज सुबह 4.30 से दोपहर 1 बजे तक और शाम को 4.30 से 9 बजे तक खुला रहता है।
5. श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर (Sri Thiruchembur Murugan Temple, Mumbai)
मुंबई के दक्षिण भारतीय मंदिरों में से एक थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर जिसे सुब्रमण्यम समाज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर अपनी कलाकृतियों और भव्यता के लिए जाना जाता है। इस मंदिर के मुख्य देवता भगवान मुरुगन है जो कि उत्तर भारत में कार्तिके के नाम से जाने जाते हैं। यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी की चोटी पर स्थित है जैसा कि दक्षिणी हिस्सों में पाए जाते हैं। इस मंदिर का निर्माण 1945 में श्री सुब्रमण्यम समाज द्वारा किया गया था। तब से लेकर आज तक यहां भक्तों की बहुत श्रद्धा है। इस मंदिर में एक चीज जो इसे अलग करती है वो है कि यहां बने भोजने को पारंपरिक रूप से केले के पत्तों में भोजन/अन्नादानम के रूप में परोसा जाता है।
श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर कहां है?
श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर चेंबुर, मुंबई में है।
श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर कब खुला रहता है?
श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर सुबह 5.30 से 11 बजे तक और शाम को 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर के सबसे पास कौन सा रेलवे स्टेशन है?
श्री थिरुचेम्बुर मुरुगन मंदिर जाने के लिए सबसे पास का रेलवे स्टेशन चेंबूर है। वहां से कैब के द्वारा जा सकते हैं।
6. बाबुलनाथ मंदिर (Babulnath Temple, Mumbai)
बाबुलनाथ मंदिर मुंबई के प्राचीन मंदिरों में से एक है। गिरगांव चौपाटी के पास एक पहाड़ी के ऊपर स्थित इस मंदिर को गुजराती समुदाय द्वारा 1890 में बनाया गया था। इस मंदिर के मुख्य देवता भगवान शिव है। जहां वैसे तो हर रोज ही भक्त दर्शन के लिए आते हैं लेकिन सोमवार, शिवरात्रि और सावन महिने में भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है। इस मंदिर के लिए मान्यता है कि 200 साल पहले मालाबार की पहाड़ी पर सुनार पांडुरंग रहता था जिसके पास कई गाय थी, गाय चराने के लिए उसने बाबुल नाम का चरवाहा रखा था। उसकी गाय में से एक कपिला नाम की गाय ने कुछ समय से दूध देना बंद कर दिया था। जिसके बाद बाबुल ने बताया कि कपिला घास खाने के बाद एक विशेष स्थान पर जाकर अपना दूध फेंक आती है। जिसके बाद सुनार उस जगह पर गया और उसने जब उस जगह की खुदाई करवाई तो खुदाई में स्वयंभी शिवलिंग निकला, तक से आजतक इस स्थान पर बाबुलनाथ का पूजन किया जा रहा है।
बाबुलनाथ मंदिर कहां है?
बाबुलनाथ मंदिर चरनी रोड मलाबार, गिरगांव चौपाटी के पास मुंबई में है।
बाबुलनाथ मंदिर के सबसे पास कौन सा रेलवे स्टेशन है?
बाबुलनाथ मंदिर के सबसे पास मरीन लाइन रेलवे स्टेशन है जहां से बड़ी ही आसनी से बाबुलनाथ मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
बाबुलनाथ मंदिर कब खुला रहता है?
बाबुलनाथ मंदिर रोजाना सुबह 5 बजे से रात 7 बजे तक खुला रहता है।
7. बाणगंगा मंदिर (Banganga Temple, Mumbai)
मुंबई में बाणगंगा जिसे वालकेश्वर मंदिर (Walkeshwar Temple) भी कहा जाता है यह सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर दक्षिण मुंबई में मालाबार की पहाडियों के पास बना है। मंदिर के पास एक छोटा सा तालाब है जिसका नाम बाणगंगा टैंक है। और इसी नाम से ये मंदिर प्रसिद्ध है। इस मंदिर के बारे में एक कथा प्रचलित है वो ये कि लंका जाते समय भगवान श्रीराम इस जगह से गुजर रहे थे तब उन्होंने यहां बालू से शिवलिंग बनाया और उसकी पूजा की। पूजा करने के बाद प्यास बुझाने के लिए तीर मारकर सरोवर का निर्माण किया। इसी कारण इस जगह को बालूकेश्वर और बाणगंगा के नाम से जाना जाता है। 1724 में रामाजी कामत नाम के एक सारस्वत ब्राह्मण ने वालूकेश्वर मंदिर का फिर से निर्माण कराया। आज यहां भक्त इस सरोवर में स्नान करते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
बालूकेश्वर मंदिर कहां है?
बालूकेश्वर मंदिर मालाबार हिल, मुंबई में है।
बालूकेश्वर मंदिर के सबसे पास में कौन सा रेलवे स्टेशन है?
बालूकेश्वर मंदिर के सबसे पास चर्नी रोड स्टेशन सबसे पास में है। यहां से प्राइवेट या शेयरिंग कैब लेकर बालूकेश्वर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
अपने धार्मिक महत्व और शाही इतिहास से सजी मुंबई में आप इनके अलावा भी कई मंदिरों में जा सकते है। यह सभी मंदिर अपने इतिहास और मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। आप यहां जाकर शांति और अध्यात्मिक अनूभुति कर सकते हैं। मंदिर और ट्रैवल से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए आप मन घुमक्कड़ यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर फॉलो कर सकते हैं। साथ ही इस लेख के बारे में अपनी राय भी आप लिख सकते हैं।

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